मुस्लिम वर्ल्ड

IAS अंसार शेख : अंसार से सुभम और फिर IAS अंसार शेख बनने की प्रेरणादायक जिन्दगी की उतार चढ़ाव की आपबीती

Sharing is caring!

पिछले साल UPSC में चयनित होने वाले महाराष्ट्रा के अंसार शेख की आईएएस बनने की कहानी बहुत ही उतार वाली है। चढ़ाव इसलिये नहीं लिखा क्योंकि शुरूआत से ही संघर्ष ने उनका साथ नहीं छोड़ा। वे जब अपने गांव से आईएएस की तैयारी के लिये पुणे पहुंचे तो उनको वहां धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। जिस मकान में उन्हें रहना था उस मकान मालिक ने मुस्लिम होने की वजह से मकान देने से इंकार दिया। तो उन्होंने अपने दोस्त शुभम का आईकार्ड इस्तेमाल करके मैस और रहने के ठिकाने का इंतजाम किया।

महाराष्ट्र के जालना के बेहद गरीब परिवार से ताअल्लुक रखने वाले अंसार शेख को UPSC में 361 वीं और महाराष्ट्रा में पहली रैंक मिली थी। मात्र 21 साल के अंसार शेख इन दिनों उत्तराखंड मसूरी में ट्रेनिंग कर रहे हैं। उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर श्री जाधव के बारे में लिखकर यह संदेश देने की कोशिश की है। कि गरीबी रोना रोकर उसे हराया नहीं जा सकता, बल्कि उससे मुकाबला करना ही जिंदगी है। अंसार शेख ने पढ़ाई के दौरान मदद करने वाले श्री जाधव के बारे में लिखा है। उन्होंने संदेश देने की कोशिश की है कि एक तरफ एक मकान मालिक ने उन्हें ‘अंसार’ होने की वजह से मकान नहीं दिया तो दूसरी तरफ एक श्री जाधव ने ‘अंसार’ की आर्थिक मदद की।

इंटरव्यू की तैयारी के लिये दिल्ली जाना था। 40 दिन वहां रहने के लिए ज़कात फाउंडेशन में एडमिशन मिल गया। लेकिन फिर भी सफर, जेब खर्च, इंटरव्यू की फीस,  सूट,  टाय इन सब चीजों के लिए कम से कम दस हजार रुपयो की जरूरत थी। दोस्तों से पहले ही बहुत ज्यादा मदद ली थी, इसलिए उन्हें और परेशान करना ठीक नहीं था। ऐसे में शमसुद्दीन तंबोली सर से बात की,  सर ने इससे पहले भी कई बार मदद की थी।

उन्होंने मुझे मराठवाड़ा मित्रमंडल कॉलेज के सेक्रेटरी श्री जाधव सर से मिलने को कहा। मुझे वे आर्थिक मदद करने वाले हैं इसकी जानकारी मुझे भी नहीं थी। उनसे मिलने के बाद तंबोली सर ने मुझे पैसो की जरूरत है ये बात छेड़ दी। जाधव सर ने तुरंत ही दस हजार रूपये दे दिये। मैंने जब भी जरूरत पड़ी तब जिन लोगो को मैं पहचानता था उनसे ही मदद ली थी, जिन लोगो को मैं जानता नहीं उनसे मैंने कभी आर्थिक मदद नहीं ली।

इसीलिये सर से पैसे लेने में मैं डर रहा था। इसलिये तंबोली सर ने कहा की ये पैसे लेलो, इससे तुम्हारे आत्मसंमान को चोट नहीं पहुचेंगी, जब भी तुम्हारे पास पैसे आ जायेंगे उन्हें लौटा देना।उनकी ये बात मुझे पसंद आई, उनसे पैसे लेकर उनका आभार मानकर मैं निकल गया।

वह 26 फरवरी 2016 का दिन था। दिल्ली जाकर मैंने इंटरव्यू की अच्छी तैयारी की, जिसका मुझे फल भी मिला। मैं रिजल्ट के बाद बहुत ज्यादा बिजी हो गया। इस बीच सर से सिर्फ एक बार मुलाकात हुई, सोचा पैसे लौटा दूं, लेकिन पैसे तब भी नहीं थे। ट्रेनिंग से छुट्टी मिली, सैलरी मिली थी, पुणे/ पूना गया, तंबोली  सर से कहा कि मुझे सर के पैसे लौटाने हैं। सर ने मुलाकात करायी इत्तेफाक से वह भी 26 फरवरी का दिन था।

जाधव सर से कुछ वक़्त बातें की और निकलने से पहले उनसे पैसे लेने की बात की। सर ने मुझे ज़िन्दगी भर का सबक दिया। उन्होंने कहा “ये पैसे लौटाओ मत, कुछ चीजो का हिसाब पैसो में चुकाया नहीं जाता, हमारे पास पैसो की कमी भी नहीं हैं। अगर कोई तुम्हारे जैसा जरूरतमंद इंसान मिले तो उसकी मदद कर देना। हमारे समाज में जाधव सर जैसे बहुत लोग हैं जो जाति धर्म से ऊपर उठकर जरूरत मंदो की मदद करते हैं। ऐसे लोगों को दिल से सलाम।

Loading...

About the author

HI Correspondant

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Connect!